तुम जैसी चमकती तारे नहीं पूछलो रात में उन्ही से सही चाँद ने बोली में हूँ न सही बोलो सूरज ने बोला सही की नहीं क्या तेरी सूरत किसी से मिली मेरी प्यारी जैसा कोई जग में नहीं दुनिया में खूभी तुम जैसे नहीं कोशिश किया पर सफल न हुई सूरज तो एक ही देखा और कही चमकती हो तुम सूरज जैसी ठीक सही सच नहीं तो प्यार तुम से कैसे हुई तुम नहीं तो वहां मैं कभी नहीं सोना तो एक ही है सोचके सोया नहीं इतनी सुन्दर होकर तुम क्यूँ पास नहीं सच में तुम एक ही हो और कोई नहीं मेरे पास में ही रहथि हो क्यूँ और कोई